Tuesday, 14 September 2021

सांची का स्तूप

*सांची के स्तूप से संबन्धित जानकारी:* 

1. सांची के स्तूप का निर्माण मौर्य सम्राट अशोक ने तीसरी शती ई.पू में करवाया था |

2. ऐसा माना जाता है अशोक ने यहीं इस स्तूप का निर्माण इसलिये कराया क्योंकि उसकी पत्नी देवी, जो विदिशा के एक व्यापारी की बेटी थी, का संबंध सांची से था |

3. सर जॉन मार्शल के नेतृत्व में 1912 से लेकर 1919 तक सांची के स्तूप की मरम्मत कराई गयी |

4. सर जॉन मार्शल ने 1919 में सांची में पुरातात्विक संग्रहालय की स्थापना की, जिसे बाद में वर्ष 1986 में सांची की पहाड़ी के आधार पर नए संग्रहालय भवन में स्थानांतरित कर दिया गया।

5. सांची में स्थित स्तूप संख्या-1 या ‘महान स्तूप’ भारत की सबसे पुरानी शैल संरचना है |

6. सांची स्तूप में बुद्ध के अवशेष पाये जाते हैं | ये स्तूप भगवान बौद्ध को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं|

7. सांची, विशेष रूप से स्तूप संख्या-1, में ब्राह्मी लिपि के शिलालेख उत्कीर्ण हैं |

8. सांची के स्तूप का व्यास 36.5 मी. और ऊँचाई लगभग 21.64 मी. है |

9. सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म अपनाने के बाद सबसे पहले जिस स्तूप का निर्माण कराया वह सांची का स्तूप ही था|

10. बौद्ध धर्म में सांची ऐतिहासिक महत्व का स्थल है,जबकि बुद्ध ने कभी भी सांची की यात्रा नहीं की थी |

11. सांची का निर्माण बौद्ध अध्ययन एवं शिक्षा केंद्र के रूप में किया गया था |

12. सारनाथ से मिले अशोक स्तम्भ, जिस पर चार सिंह बने हुये हैं, के जैसा ही एक अशोक स्तम्भ सांची से भी मिला है| इन स्तंभों का निर्माण ग्रीको-बौद्ध शैली में किया गया था |

13. सांची का स्तूप बुद्ध के ‘महापरिनिर्वाण’ का प्रतीक है|

14. वर्ष 1989 में इसे युनेस्को द्वारा ‘विश्व विरासत स्थल’ का दर्जा प्रदान किया गया

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