Ganni Khan Lakha
डेढ़ दशक से ज्यादा का भरोसा... अजरख से जुड़ा अपनापन और जैसलमेर से मारवाड़ तक पर्दे के पीछे की एक मजबूत कड़ी
सियासत में कुछ रिश्ते मंच की रोशनी में बनते हैं और कुछ रिश्ते वर्षों तक मंच के पीछे रहकर मजबूत होते जाते हैं। कुछ चेहरे कैमरों के सामने अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं, तो कुछ ऐसे भी होते हैं जिनकी पहचान ही इस बात से होती है कि वे सुर्खियों से दूर रहकर अपना काम करते हैं। जैसलमेर के शौकत मेहर इसी दूसरी श्रेणी का एक नाम हैं।
मारवाड़ की सियासत में जब सचिन पायलट का काफिला निकलता है, तो मंच पर नेता दिखाई देता है, हजारों की भीड़ दिखाई देती है और कैमरों में भाषण कैद होते हैं। लेकिन उस पूरे राजनीतिक सफर के पीछे स्थानीय स्तर पर कुछ ऐसे लोग भी होते हैं, जिन पर वर्षों से भरोसा कायम रहता है। शौकत मेहर उन्हीं भरोसेमंद चेहरों में से एक हैं।
इसीलिए मारवाड़ में उनके लिए एक दिलचस्प और अपनेपन से भरा संबोधन सुनने को मिलता है—
*“सचिन पायलट के मारवाड़ रथ के पायलट।”*
यह उपमा सिर्फ शब्दों का खेल नहीं है। इसके पीछे 15 वर्षों से अधिक पुराने संपर्क, लगातार साथ और मारवाड़ में मजबूत स्थानीय जुड़ाव की कहानी है।
जब भी पायलट का मारवाड़ दौरा, याद आता है एक नाम
बाड़मेर हो, जैसलमेर, बालोतरा, जालोर या पाली—सचिन पायलट का मारवाड़ दौरा अपने आप में राजनीतिक रूप से खास माना जाता है। ऐसे दौरों में स्थानीय परिस्थितियों, लोगों से संपर्क और कार्यक्रमों की तैयारियों की अपनी अहमियत होती है।
शौकत मेहर की भूमिका यहीं से खास हो जाती है। लंबे समय से पायलट के साथ जुड़े होने के कारण स्थानीय स्तर पर उनका नेटवर्क और क्षेत्र की सामाजिक समझ उनकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है।
खास बात यह है कि शौकत मेहर ने अपने लिए कभी “फ्रंटलाइन लीडर” वाली छवि गढ़ने की कोशिश नहीं की। उनका अंदाज अलग रहा—काम ज्यादा, प्रदर्शन कम।
राजनीति में जहां हर कोई सामने दिखाई देना चाहता है, वहां पर्दे के पीछे रहकर लगातार सक्रिय रहना अपने आप में एक अलग पहचान है। शायद यही वजह है कि वर्षों के इस रिश्ते में औपचारिकता से ज्यादा विश्वास और आत्मीयता दिखाई देती है।
*अजरख... जो स्वागत से बढ़कर एक पहचान बन गया*
शौकत मेहर और सचिन पायलट के रिश्ते का सबसे खूबसूरत सांस्कृतिक पक्ष है—अजरख।
मारवाड़ की संस्कृति में अजरख सिर्फ एक पारंपरिक वस्त्र नहीं है। यह सम्मान, अपनत्व और मेहमाननवाजी की निशानी भी है। शौकत मेहर जब सचिन पायलट के मारवाड़ आगमन पर अजरख लेकर उनके स्वागत के लिए खड़े होते हैं, तो यह दृश्य धीरे-धीरे एक पहचान बन गया।
पायलट के गले में अजरख और सामने खड़ा मारवाड़—यह तस्वीर कई मौकों पर एक खास सांस्कृतिक संदेश देती दिखाई देती है।
शौकत मेहर ने अजरख को केवल स्वागत की परंपरा तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे मारवाड़ की संस्कृति और राजनीतिक आत्मीयता के प्रतीक के रूप में सामने लाने का काम किया। यही कारण है कि सचिन पायलट के मारवाड़ दौरों की चर्चा में अजरख का जिक्र भी अब सहज रूप से जुड़ जाता है।
एक तरह से देखें तो शौकत मेहर ने अजरख को पहनाया ही नहीं, उसकी कहानी भी लोगों तक पहुंचाई।
जैसलमेर की मेहरों की ढाणी से निकला सामाजिक सरोकार
शौकत मेहर का जुड़ाव जैसलमेर की मेहरों की ढाणी से है। जैसलमेर की रेत, वहां की संस्कृति और समाज से उनका गहरा संबंध उनकी पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मेहर परिवार की पहचान केवल व्यवसाय या राजनीतिक संपर्कों तक सीमित नहीं रही। परिवार ग्रेनाइट व्यवसाय से जुड़ा हुआ है और परिवार से जुड़े ग्रेनाइट के दिल्ली के संसद भवन तथा राष्ट्रीय युद्ध स्मारक जैसे महत्वपूर्ण स्थलों में उपयोग होने की जानकारी भी सामने आती है।
लेकिन किसी परिवार की असली पहचान केवल उसके व्यवसाय से नहीं बनती, बल्कि समाज के प्रति उसके व्यवहार से बनती है।
शिक्षा हो, चिकित्सा हो या स्वास्थ्य—मेहर परिवार लंबे समय से सामाजिक सरोकारों में अपनी भागीदारी निभाता रहा है। जरूरतमंद विद्यार्थियों की सहायता, गरीब परिवारों का सहयोग और बेटियों के विवाह में मदद जैसे कार्यों ने परिवार को क्षेत्र में एक अलग सामाजिक पहचान दी है।
यही कारण है कि शौकत मेहर की कहानी केवल राजनीति से जुड़ी कहानी नहीं है। इसके एक छोर पर मारवाड़ की सियासत है, तो दूसरे छोर पर समाजसेवा और स्थानीय सरोकारों की जमीन।
पर्दे के पीछे रहने वाला वह चेहरा, जिस पर भरोसा कायम है
सियासत में लोकप्रियता हासिल करना आसान हो सकता है, लेकिन लंबे समय तक किसी का भरोसा बनाए रखना आसान नहीं होता।
डेढ़ दशक से अधिक समय का साथ यही बताता है कि शौकत मेहर और सचिन पायलट के बीच संबंध केवल किसी एक कार्यक्रम या किसी एक राजनीतिक दौर तक सीमित नहीं रहे।
शौकत मेहर की खासियत शायद यही है कि वे अपनी भूमिका को शोर के साथ नहीं, बल्कि जिम्मेदारी के साथ निभाते हैं। वे कैमरे के सामने कम और काम के दौरान ज्यादा दिखाई देते हैं।
मारवाड़ की राजनीति में बड़े नामों की चर्चा खूब होती है, लेकिन उन नामों के पीछे खड़े लोगों की कहानी कम ही सामने आती है। शौकत मेहर ऐसी ही कहानी का नाम हैं।
जैसलमेर की मेहरों की ढाणी से लेकर मारवाड़ की राजनीतिक यात्राओं तक, अजरख की आत्मीयता से लेकर समाजसेवा की परंपरा तक—शौकत मेहर ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है।
और शायद इसी पहचान को सबसे बेहतर तरीके से एक ही पंक्ति में कहा जा सकता है—
*“जब सचिन पायलट का मारवाड़ रथ निकलता है, तो उसके साथ चलने वाला एक भरोसा भी चलता है—शौकत मेहर।”*